न्याय की गुहार लगाने वाला युवक बना आरोपी, दबंग पर कार्रवाई कब?
संवाददाता, देवरिया।
सलेमपुर तहसील में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अपने हक की जमीन और बाउंड्रीवाल बचाने के लिए एक माह से अधिकारियों के चक्कर काट रहे युवक को न्याय तो नहीं मिला, उल्टे हंगामा करने के आरोप में पुलिस थाने पहुंचा दिया गया।
हरैया वार्ड निवासी रितिक गुप्ता उर्फ विकास का आरोप है कि उनके पड़ोसी ने उनकी बाउंड्रीवाल के ऊपर छत डालकर अतिक्रमण कर लिया। पीड़ित का कहना है कि उसने लेखपाल, नायब तहसीलदार, एसडीएम और यहां तक कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता रहा।
सोमवार को जब युवक अपनी शिकायत लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा तो उसकी नाराजगी फूट पड़ी। प्रशासन ने इसे हंगामा मानते हुए उसके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई शुरू कर दी और पुलिस उसे कोतवाली ले गई।
बड़ा सवाल
जब मजिस्ट्रेट की जांच में दूसरे के अधिकार क्षेत्र में दीवार और निर्माण का मामला सामने आया, तो अतिक्रमण हटाने या पीड़ित को राहत देने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर शिकायतकर्ता को ही कटघरे में खड़ा करने से न्याय व्यवस्था पर क्या संदेश जाएगा?
स्थानीय लोगों में चर्चा
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी तो प्रशासन को तत्काल निर्णय लेना चाहिए था। लेकिन अब मामला दीवानी अदालत की ओर बढ़ रहा है, जहां न्याय मिलने में वर्षों लग सकते हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
- क्या दबंगों को समय और पीड़ितों को कार्रवाई मिल रही है?
- जांच रिपोर्ट आने के बाद भी राहत क्यों नहीं?
- शिकायतकर्ता की सुनवाई के बजाय उस पर कार्रवाई क्यों?
फिलहाल, न्याय की आस लगाए युवक के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसकी जमीन का हक पहले मिलेगा या शांति भंग का मुकदमा?