शास्वत शौर्य तिवारी बने महंत, वैदिक रीति से हुआ अभिषेक
रेवती (बलिया)। जनपद बलिया के रेवती बस स्टैंड स्थित प्राचीन मझौवा मठ, लक्ष्मी नारायण मंदिर में रविवार को धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार एवं संत-महात्माओं की उपस्थिति में 11 वर्षीय बालक शास्वत शौर्य तिवारी को मठ का नया महंत घोषित किया गया। अभिषेक के पश्चात उनका नया आध्यात्मिक नाम श्याम नारायण रामानुज श्री वैष्णोदास रखा गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान के साथ हुआ। सबसे पहले शास्वत शौर्य तिवारी का उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया, जिसके बाद उन्हें गुरु दीक्षा प्रदान की गई। प्रसिद्ध संत रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने वैदिक मंत्रों के मध्य उनका अभिषेक कर उन्हें महंत पद की जिम्मेदारी सौंपी।
इस अवसर पर रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने बताया कि मठ की प्राचीन परंपरा के अनुसार, किसी महंत के गोलोकवासी होने के बाद उसी परिवार के योग्य एवं बालब्रह्मचारी सदस्य को गद्दी सौंपी जाती है। इसी परंपरा के निर्वहन के तहत शास्वत शौर्य तिवारी को महंत पद पर आसीन किया गया है। उन्होंने कहा कि बालक की आयु अभी कम है, इसलिए वे गुरुजनों के सानिध्य में रहकर धार्मिक, आध्यात्मिक एवं शास्त्रीय शिक्षा प्राप्त करेंगे तथा भविष्य में मठ की परंपराओं का संचालन करेंगे।
अभिषेक समारोह में क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित संत-महात्मा एवं विद्वान उपस्थित रहे। इनमें कदम चौराहा बलिया स्थित बड़ा मठिया के महंत रामउदार दास, छोटी मठिया के महंत सीताराम दास, काशी के महंत रामनारायण दास त्यागी, श्रीश्री 1008 विनय ब्रह्मचारी, बाबा महेंद्रनाथ मठ के महंत तारकेश्वर गिरि तथा त्यागी महाराज प्रमुख रूप से शामिल रहे।
वैदिक अनुष्ठानों को पंडित घनश्याम मिश्र, सुनील पाण्डेय शास्त्री, रविशंकर पाण्डेय एवं अवधेश पाण्डेय ने विधिवत संपन्न कराया। उनके मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।
समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक एवं भक्तगण उपस्थित रहे। महंत पद ग्रहण करने के बाद श्रद्धालुओं ने नव नियुक्त महंत श्याम नारायण रामानुज श्री वैष्णोदास का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की कामना की।
यह आयोजन न केवल मठ की धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का भी संदेश देता नजर आया। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन की चर्चा रही और श्रद्धालुओं ने इसे मठ की गौरवशाली परंपरा का ऐतिहासिक क्षण बताया।