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छठ महापर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब

छठ महापर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब

नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय सूर्य उपासना का पर्व

देवरिया (उत्तर प्रदेश)।
आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का प्रतीक छठ महापर्व पूरे जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। शनिवार को नहाय-खाय के साथ इस चार दिवसीय पर्व की पवित्र शुरुआत हुई। महिलाओं ने सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान कर भगवान भास्कर और छठी मइया की आराधना की तथा घर में शुद्धता और सात्त्विकता का वातावरण बनाकर अरवा चावल, लौकी की सब्जी और चने की दाल का प्रसाद ग्रहण किया।

रविवार को खरना का व्रत मनाया जाएगा, जिसमें व्रती महिलाएँ पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को गुड़ और दूध से बने खीर-रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगी। खरना के बाद से व्रतधारिणी लगातार 36 घंटे तक निर्जल रहकर सूर्य देव की आराधना करेंगी।

सोमवार की शाम को अर्घ्यदान के लिए घाटों पर जनसैलाब उमड़ेगा। सभी नदी, तालाब और कृत्रिम जलाशयों को सजाया जा रहा है। नगर निगम और ग्राम पंचायतें घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम में जुटी हैं। जगह-जगह स्वयंसेवक संगठन घाटों पर सेवा कार्यों में लगे हैं।

मंगलवार की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएँ अपना व्रत पूर्ण करेंगी। इस दौरान घाटों पर “उगते सूर्य को अर्घ्य” देने की अद्भुत छटा देखने को मिलेगी। सूर्य की पहली किरण जैसे ही जल पर पड़ेगी, वातावरण ‘छठ मइया के जयकारों’ से गूंज उठेगा।

जिले में प्रमुख छठ घाट — देवरिया का राघव नगर पोखरा, सलेमपुर का राप्ती तट, भटनी का कोसी घाट, रतनपुरा तालाब और रामपुर कारखाना पोखरा — को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।

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छठ पर्व के दौरान पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी दिया जा रहा है। कई स्वयंसेवी संस्थाएँ लोगों से प्लास्टिक का उपयोग न करने और प्राकृतिक प्रसाद सामग्री का प्रयोग करने की अपील कर रही हैं।

 

मुख्य विशेषताएँ:

चार दिवसीय पर्व: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य

प्रमुख उपासना: भगवान सूर्य और छठी मइया

विशेषता: निर्जला व्रत, शुद्धता, सामूहिकता और अनुशासन

उद्देश्य: सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना

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