महापर्व छठ पर उमड़ी आस्था — रतनपुरा, रोपन छपरा और परासी चकलाल के घाटों पर दिखा भक्ति का सागर
महापर्व छठ पर उमड़ी आस्था — रतनपुरा, रोपन छपरा और पारसी चलाल के घाटों पर दिखा भक्ति का सागर
देवरिया (ग्रामीण न्यूज़ तेज नज़र):
देवरिया जनपद के रतनपुरा, रोपन छपरा और पारसी चलाल सहित आसपास के गांवों में महापर्व छठ पूजा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

गंडक नदी के तट पर सोमवार की शाम और मंगलवार की सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
हर ओर भक्ति और विश्वास का दृश्य दिखाई दिया।
छठ क्या है
छठ पर्व सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व है।
इस व्रत में सूर्य देव और उनकी बहन छठी मइया की पूजा की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि छठ की शुरुआत वैदिक काल से हुई थी, जब लोग सूर्य की आराधना कर ऊर्जा और स्वास्थ्य की कामना करते थे।
महाभारत काल में भी कुंती और द्रौपदी द्वारा छठ व्रत किए जाने के उल्लेख मिलते हैं।

चार दिन का आस्था पर्व
यह पर्व चार दिनों तक चलता है —
पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन संध्या अर्घ्य, और चौथा दिन भोर का अर्घ्य।
हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है, जो शुद्धता, संयम और आत्मिक शक्ति का प्रतीक है।

स्थानीय आयोजन
रतनपुरा, रोपन छपरा और पारसी चलाल गांवों में सोमवार की शाम महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर डाला उठाकर गंडक नदी के तट पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया।

मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया।
घाटों पर महिलाओं की लंबी कतारें सुबह-सुबह देखने को मिलीं।

ग्राम प्रधानों द्वारा घाटों की सफाई, टेंट और रोशनी की व्यवस्था पहले से कराई गई थी।
प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे, जिससे पूरे आयोजन में सुरक्षा और शांति बनी रही।
युवाओं ने भी पूजा का सामान सिर पर उठाकर घाट तक पहुंचाने में सहयोग दिया।

श्रद्धा का माहौल
पूरे क्षेत्र में छठ मइया के गीतों की मधुर गूंज सुनाई दी।
दीपों की रौशनी और नदी किनारे जलते दीयों से वातावरण और भी मनमोहक बन गया।
छठ मइया की जयकारों के बीच हर चेहरा भक्ति और विश्वास से झूमता दिखाई दिया।

रिपोर्ट — ग्रामीण न्यूज़ तेज नज़र टीम, रतनपुरा (देवरिया