“शिक्षा या शोषण? देवरिया में स्कूलों की मनमानी से अभिभावक बेहाल”
शिक्षा या शोषण? देवरिया में स्कूलों की मनमानी से अभिभावक बेहाल
एडमिशन फीस, ड्रेस-किताबों की जबरन खरीद और परीक्षा शुल्क के नाम पर लूट—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
देवरिया (उत्तर प्रदेश):
जनपद देवरिया में शिक्षा के नाम पर अभिभावकों के साथ हो रहा आर्थिक शोषण अब गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। निजी व अर्द्ध-सरकारी विद्यालयों की मनमानी ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। हर साल बच्चों की कक्षा बदलते ही स्कूल प्रबंधन फिर से “एडमिशन फीस” के नाम पर हजारों रुपये वसूल रहा है, जबकि छात्र उसी विद्यालय में पहले से अध्ययनरत होते हैं।
इतना ही नहीं, परीक्षा के समय अलग से “परीक्षा शुल्क” भी लिया जाता है, जो कई मामलों में पूरी तरह अनुचित और अव्यवहारिक बताया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यह शुल्क किसी स्पष्ट नियम के तहत नहीं, बल्कि मनमाने ढंग से तय किया जाता है।
ड्रेस और किताबों के नाम पर खेल
विद्यालयों द्वारा हर वर्ष नई ड्रेस, नई किताबें और कॉपियां अनिवार्य कर दी जाती हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये सामग्री सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं होती। अभिभावकों को विद्यालय द्वारा तय की गई दुकानों से ही खरीदारी करने के लिए मजबूर किया जाता है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों और दुकानदारों के बीच सांठगांठ के चलते सामान ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। यदि कोई अभिभावक बाहर से सस्ती सामग्री खरीदने की कोशिश करता है, तो उसे साफ मना कर दिया जाता है।
“संगठित लूट” का आरोप
स्थानीय अभिभावकों ने इसे एक “संगठित आर्थिक शोषण” करार दिया है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को व्यवसाय बना दिया गया है, जहां मुनाफा कमाना ही प्राथमिक उद्देश्य बन गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले से प्रशासन अनजान नहीं है, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
संबंधित अधिकारियों से सीधे सवाल:
👉 जिला प्रशासन से सवाल:
- क्या निजी स्कूलों द्वारा हर साल एडमिशन फीस लेना वैध है?
- ड्रेस और किताबों की जबरन खरीद पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
- क्या इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी?
👉 शिक्षा विभाग से सवाल:
- क्या स्कूलों को अपनी मनमानी फीस तय करने की खुली छूट है?
- एक समान पाठ्यक्रम और किताबों की व्यवस्था क्यों नहीं लागू की जा रही?
- क्या अभिभावकों के हित में कोई ठोस नीति बनाई जाएगी?
👉 प्रदेश सरकार से सवाल:
- शिक्षा को व्यवसाय बनने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- क्या स्कूलों की फीस और सामग्री बिक्री पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून लागू होंगे?
विशेषज्ञों की राय:
शिक्षा को सेवा का माध्यम माना जाना चाहिए, न कि मुनाफा कमाने का जरिया। यदि समय रहते सख्त नियम और पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
निष्कर्ष:
देवरिया जिला में शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे ये सवाल केवल एक जिले की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब तक मौन रहते हैं या फिर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।