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राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवॉर्ड में बड़ा घोटाला? सांसदों के पत्र से मचा हड़कंप, चयन सूची पर उठे गंभीर सवाल

राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवॉर्ड में बड़ा घोटाला? सांसदों के पत्र से मचा हड़कंप, चयन सूची पर उठे गंभीर सवाल
देवरिया। उत्तर प्रदेश सरकार के युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग द्वारा संचालित राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवॉर्ड 2024-25 की चयन प्रक्रिया अब गहरे विवादों में घिरती नजर आ रही है। युवाओं के सम्मान से जुड़े इस प्रतिष्ठित पुरस्कार में कथित अनियमितताओं ने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक हलचल मचा दी है।
सलेमपुर से सांसद रामशंकर राजभर ने केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं देवरिया से भाजपा सांसद शशांक मणि ने प्रमुख सचिव, खेल (युवा कल्याण) विभाग को पत्र भेजकर निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दोनों सांसदों के पत्र सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है।
चयन के बाद नाम बाहर! आखिर किसके दबाव में बदली सूची?
प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई-अगस्त 2024 में आवेदन आमंत्रित किए गए थे। परीक्षण व मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जुलाई 2025 में अंकों के आधार पर 15 युवाओं की सूची जारी की गई, जिनमें शीर्ष 10 को सम्मानित किया जाना था।
9 जनवरी 2026 को चयनित युवाओं को पत्र भेजकर 11 जनवरी को लखनऊ मुख्यालय बुलाया गया। आरोप है कि वरीयता क्रम संख्या तीन पर चयनित देवरिया के देवानंद राय और क्रम संख्या नौ पर चयनित लखनऊ के अवधेश कुमार ने सभी अभिलेख, बैंक विवरण और हस्ताक्षर जमा कर दिए थे। इसके बावजूद घंटों इंतजार कराने के बाद उन्हें मौखिक रूप से यह कहकर बाहर कर दिया गया कि अब वे चयनित नहीं हैं।
बड़ा सवाल यह है कि यदि चयन प्रक्रिया अंकों के आधार पर हुई थी तो अंतिम क्षणों में नाम हटाने का अधिकार किसे और क्यों दिया गया? क्या कोई दबाव था? क्या मेरिट सूची बदली गई? या फिर नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई?
“युवाओं के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” – विशाल
मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता साहू विशाल कुमार गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि चयन सूची में शामिल युवाओं के नाम बिना लिखित कारण हटाए गए हैं तो यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि विवेकानंद यूथ अवॉर्ड जैसे सर्वोच्च युवा सम्मान में यदि पारदर्शिता नहीं रहेगी तो यह प्रदेश की युवा नीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
सरकार की साख दांव पर
जानकारों का कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल दो युवाओं का मामला नहीं रहेगा, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता कटघरे में होगी। युवाओं में रोष व्याप्त है और कई संगठन खुलकर विरोध की तैयारी में हैं।
अब निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं—
क्या होगी उच्चस्तरीय जांच?
क्या बहाल होंगे हटाए गए नाम?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि युवाओं के सम्मान से जुड़े इस विवाद ने सरकार और विभाग दोनों को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।

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