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बड़ी खबर: लार में भाजपा नेता अरुण कुमार सिंह का कीचड़ में लेटकर विरोध, प्रशासन हरकत में – जनता में उठे कई सवाल

बड़ी खबर: लार में भाजपा नेता अरुण कुमार सिंह का कीचड़ में लेटकर विरोध, प्रशासन हरकत में – जनता में उठे कई सवाल

देवरिया:
जनपद के लार क्षेत्र से सोमवार को एक अनोखा लेकिन गंभीर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं। भाजपा के जुझारू और तेजतर्रार नेता अरुण कुमार सिंह अधूरे पड़े सड़क निर्माण कार्य को लेकर सड़क पर कीचड़ में लेट गए। यह नजारा देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और स्थानीय प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। आनन-फानन में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्य को शुरू कराने का आश्वासन दिया।

अधूरी सड़कों से त्रस्त जनता

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली सड़क नहीं है। पूरे जनपद में दर्जनों ऐसे मार्ग हैं, जो महीनों से अधूरे पड़े हुए हैं। कई जगह थोड़ी-बहुत मिट्टी डालकर या रोलर चलाकर काम अधूरा छोड़ दिया गया है। बरसात के मौसम में यह सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

 

भाजपा शासन में भाजपा नेता को धरना क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब प्रदेश और केंद्र – दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तो आखिर भाजपा के ही नेता को धरना-प्रदर्शन का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
लोगों का कहना है कि यदि विपक्षी दल इस तरह का विरोध करते तो शायद प्रशासन कोई संज्ञान नहीं लेता। लेकिन भाजपा नेता द्वारा कीचड़ में लेटने का प्रदर्शन होते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को “भाजपा सरकार की विडंबना” बताया जा रहा है।

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विपक्ष का तंज

इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया। उन्होंने योगी सरकार को घेरते हुए कहा कि “जब भाजपा के अपने ही नेता सड़क पर लेटकर धरना देने को मजबूर हों, तो समझ लेना चाहिए कि सरकार जनता की समस्याओं से पूरी तरह बेखबर है।”
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि भाजपा की सरकार में आखिर जनता को राहत कब मिलेगी और कब तक केवल प्रदर्शन पर ही कार्यवाही होगी?

जनता का गुस्सा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा सड़क, बिजली और रोजगार के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों की याद सिर्फ चुनावी पोस्टरों तक सीमित रह जाती है। लार बाईपास समेत कई सड़कें वर्षों से अधूरी हैं। अब हाल यह है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को ही प्रदर्शन करना पड़ रहा है, तब जाकर प्रशासन हरकत में आता है।

उठते सवाल

क्या भाजपा सरकार अपने ही कार्यकर्ताओं की आवाज़ पर काम करेगी?

विपक्षी दलों के आंदोलन की अनदेखी क्यों की जाती है?

अधूरी सड़कों का ठेका किसे दिया गया और आखिर बार-बार काम अधूरा क्यों छोड़ दिया जाता है?

जनता की गाढ़ी कमाई से निकले टैक्स का इस्तेमाल आखिर कहां हो रहा है?

निष्कर्ष 

लार की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनता की समस्याओं का समाधान सरकार के स्तर पर होना चाहिए या फिर नेताओं को कीचड़ में लेटकर विरोध करना पड़ेगा?
फिलहाल अरुण कुमार सिंह का यह प्रदर्शन सुर्खियों में है और लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार पहले से ही गंभीर होती, तो भाजपा नेता को सड़क पर लेटने की नौबत ही नहीं आती।

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