स्कूली बच्चे शहर की सड़कों पर वाहनों से फर्राटा भरते आसानी से देखे जा सकते, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिखते..
- ग्रामीण न्यूज तेज नजर
- यातायात पुलिस के जागरूकता अभियान का भी इनपर कोई असर नही..
- नाबालिग बच्चों से लेकर अधेड़ उम्र के लोग ई-रिक्शा चलाते..
- ग्रामीण न्यूज तेज नजर एक अपील करता है कि अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को ना दें वाहन
देवरिया में आज कल शहरों व कस्बों या गावों में देखा जा रहा है कि यातायात के नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम नाबालिग बच्चें वाहन चला रहे हैं और बच्चों के अभिभावक भी इन नाबालिग बच्चों को वाहन देकर अपने आपको गौरवशाली मान रहें हैं!आज जबकि सड़कों पर वाहन चलाना अब खतरों से खाली नहीं है। सड़कों पर नाबालिग यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाकर वाहन दौड़ा रहे हैं!

नाबालिगों द्वारा चलाए जाने वाले वाहनों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। खासकर स्कूली बच्चे शहर की सड़कों पर वाहनों से फर्राटा भरते आसानी से देखे जा सकते हैं। अभिभावक और स्कूल प्रबंधन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है।ये लापरवाही दूसरे वाहन चालकों के साथ साथ वाहन चलाने वाले नाबालिगों और उनके अभिभावकों को बड़ी चोट दे सकती है।यातायात पुलिस के जागरूकता अभियान का भी इनपर कोई असर होता नहीं दिख रहा है।नाबालिग बच्चो के वाहनों की मार्गों पर इनकी रफ्तार हवा से बातें करने वाली होती हैं। बाइक और कार ही नहीं ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन भी बड़े पैमाने पर नाबालिग कर रहे हैं।

नियमानुसार यह गलत है। इनके पास न तो लाइसेंस है और न ही वाहन चलाने की परिपक्वता। ऐसे में दुर्घटना होने का भय रहता है।सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन कैसे होता है, यह बखूबी देखा जा सकता है। खासकर तब जब विद्यालय खुले हों। नियम के कानूनों की बात करें तो ड्राइविंग लाइसेंस न होने पर ढाई हजार और दुर्घटना की स्थिति में 25 हजार रुपये तक जुर्माने का नियम हैं लेकिन कई बार ट्रिपलिंग करते यह कम उम्र के यह बच्चे देखे जाते हैं। हाईवे के किनारे तो अक्सर अभिभावक खुद अपने हाथों से कार के स्टेयरिंग तक इनके हाथों में थमा देते हैं!यही नहीं, छोटे-छोटे बच्चे भी ई-रिक्शा चलाते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे। जो अपनी और उसमें बैठने वाली सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। शहर में स्थित कई बड़े स्कूलों में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी दो पहिया वाहनों पर आते हैं।