इस नए ज़माने की दुनिया में असली और नकली का आखिर जिम्मेदार मौन क्यों
इस नए ज़माने की दुनिया में असली और नकली का आखिर जिम्मेदार मौन क्यो
ग्रामीण न्यूज तेज नजर
इस नए ज़माने की दुनिया में नकली और असली में फर्क करना बहूत भारी हैं यहां आजकल नकली का प्रचलन ज्यादा हो गया है और यही नही जब हम नकली उत्पादों के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में बैग या जूते जैसे विलासिता के उत्पाद आते हैं! लेकिन नकली उत्पाद हर तरह के उत्पादों में घुस गए हैं।ऐसा लगता है कि आम नागरिकों ने अपनी समस्याओं को सहज मान लिया है!इन सबके बीच व जीना सीख गए है!नकली मुद्रा, मिलावटी दूध, नकली खाद, नकली पुजें, मिलावटी पेय पदार्थ, नकली दवाइयां-इंजेक्शन, नकली पनीर, नकली डिग्रियां, नकली कालेज,फर्जी डाक्टर, नकली बैंक खाते तथा नकली डिजिटल पुलिस और न जाने क्या-क्या हम अपने आसपास लगातार देख रहे हैं!हैरानी की बात है कि धोखाधड़ी करने वालों के लिए कानून इतने लचीले है कि तुरंत ही उनको जमानत भी मिल जाती है, जबकि दूसरे देशों में ऐसा करने वालों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाती है। कई देशों में तो मृत्युदंड तक का प्रावधान है!हमारे यहां नियामक संस्थानों के अधिकारी इन्हें रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं!समय की मांग है कि गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए। खाद्य पदार्थों की जांच में कड़ा रुख अपनाया जाए। इसके साथ-साथ अलग से नियामक की स्थापना जाए, जिसमें उस क्षेत्र से संबद्ध विशेषज्ञ शामिल किए जाने चाहिए। सरकार, सामाजिक संस्थाओं और उपभोक्ता समूहों को साथ लेकर चलना होगा।