बीएलओ सुपरवाइजर प्रशिक्षण में अव्यवस्थाएं, बिजली न होने पर मोबाइल की रोशनी में कार्य करते दिखे शिक्षक
बीएलओ सुपरवाइजर प्रशिक्षण में अव्यवस्थाएं, बिजली न होने पर मोबाइल की रोशनी में कार्य करते दिखे शिक्षक
सलेमपुर, देवरिया 21 अगस्त 2025
सलेमपुर तहसील सभागार में बृहस्पतिवार को दोपहर 2:00 बजे लार ब्लाक व 3:00 बजे से सलेमपुर के बीएलओ , सुपरवाइजर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक शामिल हुए। लेकिन प्रशिक्षण के दौरान बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिली। सभागार में बिजली नहीं होने के कारण शिक्षक मोबाइल की रोशनी में प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज भरते और निर्देशों को समझते नजर आए।
गर्मी और अंधेरे में प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे, वहीं कई शिक्षकों ने इस तरह की अनियमितताओं को गंभीर लापरवाही बताया। उनका कहना था कि जब हमसे चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में दक्षता की अपेक्षा की जाती है, तो प्रशिक्षण में कम से कम बिजली जैसी मूलभूत सुविधा तो उपलब्ध होनी ही चाहिए। 3:00 बजे करीब बिजली आने के बाद लार व सलेमपुर का प्रशिक्षण एक साथ की गई।
प्रधानाध्यापकों पर अतिरिक्त कार्यभार, विद्यालय संचालन पर संकट की आशंका
सुपरवाइजर प्रशिक्षण एवं चुनाव ड्यूटी के सिलसिले में कई ऐसे प्रधानाध्यापकों को भी नियुक्त कर दिया गया है, जो पहले से ही विद्यालय में भोजन व्यवस्था, शिक्षण कार्य और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना, बच्चों की उपस्थिति, पठन-पाठन की निगरानी, शिक्षकों का समन्वय जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रधानाध्यापक द्वारा संचालित किए जाते हैं। ऐसे में जब उन्हें बीएलओ सुपरवाइजर की जिम्मेदारी के लिए चुनाव ड्यूटी में लगाया जाता है, तो विद्यालय संचालन में गंभीर अव्यवस्था उत्पन्न होने की आशंका बन जाती है।
शिक्षकों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों की निपुणता सुनिश्चित करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन BLO जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से वे शिक्षण कार्य से दूर हो जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
निपुण भारत मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम तभी सफल हो सकते हैं जब शिक्षक पूरी तरह शिक्षण पर केंद्रित रहें। अतः निवेदन है कि BLO जैसे कार्यों की जिम्मेदारी अन्य विभागों को सौंपी जाए और शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए।
चिंता की बात यह भी है कि कुछ विकलांग शिक्षक व प्रधानाध्यापकों की भी बीएलओ तथा सुपरवाइजर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, बल्कि उनके विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
शिक्षकों की मानें तो ड्यूटी निर्धारण से पूर्व विद्यालय की शैक्षिक स्थिति, शिक्षक संख्या और व्यक्तिगत परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए, ताकि न तो चुनाव कार्य प्रभावित हो और न ही बच्चों की पढ़ाई।