परिवहन विभाग की सरपरस्ती कहें या कोताही,परिवहन विभाग को लग रहा राजस्व का चूना..!
कुछ प्राइवेट गाड़ियों प्रेस व किसान यूनियनों का लॉगऑन लगाकर खुलेआम सांवरिया ढो रही और टैक्सी परमिट की गाड़ी वालों के पेट पर लात मार रहे..!!
परिवहन विभाग की सरपरस्ती कहें या कोताही जो प्राइवेट टैक्सी वाले खुलेआम प्राइवेट टैक्सी बनाकर धड़ल्ले से रोड पर गाड़िया चला रहें हैं और संबंधित विभाग इनपर लग़ाम लगाने में नाकाम होता नजर आ रहा हैं!जबकि टैक्सी परमिट वाले अपनी रोजी रोटी के लिए के लिए दर दर की ठोकरे खाने पर विवश हो रहे हैं तथा वही कुछ विभाग के अधिकारी भी परिवहन के नियमों को मखौल उड़ा रहे हैं!सरकारी कार्यालय में अधिकारियों की खिदमत में लगे हुए कुछ वाहन नियमों के विरुद्ध बिना टैक्सी परमिट के लगे हुए हैं इससे यातायात के नियमों का उल्लंघन तो हो ही रहा है साथ ही परिवहन विभाग को राजस्व की हानि भी हो रही है!ऐसे सरकारी विभाग जिनके पास खुद के वाहन नहीं है ऐसे विभागों में अधिकारियों की सुविधा के लिए सरकारी खर्चे पर किराए के चार पहिया वाहन लगाए जाते हैं और परिवहन विभाग के नियमों के क्रम में सरकारी विभागों में किराए पर उन्हीं वाहनों को रखा जाता है जिनका परिवहन विभाग से टैक्सी परमिट स्वीकृत हो इसके अलावा कुछ जिलों में टैक्सी परमिट वाली गाड़ियों का व्यापार प्राइवेट नंबर की टैक्सियों ने चौपट कर दिया हैं!यही नहीं कुछ प्राइवेट गाड़ियों पर तो प्रेस व किसान यूनियनों का लॉगऑन लगाकर खुलेआम सांवरिया ढो रहे हैं और टैक्सी परमिट की गाड़ी वालों के पेट पर लात मार रहे हैं!दरअसल टैक्सी परमिट की गाड़ी से प्राइवेट टैक्सी-कार किराए पर सस्ती पड़ती है टैक्सी परमिट की गाड़ी का किराया प्रति किलोमीटर अलग हैं तथा प्राइवेट नंबर गाड़ीया कम रुपए प्रति किमी कम किराए पर मिल जाती है ऐसे में लोग टैक्सी परमिट की गाड़ी किराए पर नहीं लेना पसंद नही करते और टैक्सी परमिट गाड़ी को कॉमर्शियल टैक्स चुकाना पड़ता है जो कि प्राइवेट रजिस्ट्रेशन गाड़ियों से दोगुना है तथा फिटनेस पॉल्युशन सर्टिफिकेट सहित कई और तरह के खर्च और भी हैं वहीं अब टैक्सी परमिट गाड़ियों में स्पीड गवर्नर भी लगा दिए गए हैं जिससे स्पीड भी नियंत्रित रहती है जबकि प्राइवेट नंबरों की गाड़ियों में ना तो इतने पैसे खर्च होते हैं और ना ही स्पीड की कोई लिमिट है केवल कुछ टूरिस्ट ही टैक्सी परमिट वाली गाड़ियां किराए पर लेते हैं पर ऐसे पर्यटक कभी कभार ही मिल पाते हैं!लोग सस्ते किराये और जल्दी पहुंचने के लिए प्राइवेट नंबर की गाड़ियां ही किराए पर करते हैं हालत यह है कि टैक्सी नंबर की गाड़ियाें के मालिक महीने की किस्त भी नहीं निकाल पा रहे! परिवार चलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है!कुछ शहरों में टैक्सी परमिट वाली गाड़ियां निर्धारित स्टैंड पर दिनभर खड़ी रहती हैं कई दिन तक इन्हें किराए पर लेने वाला तक नहीं मिलता!इससे सरकार को भी रेवेन्यू का काफी नुकसान उठाना पढ़ रहा है! टैक्सी परमिट गाड़ी संचालकों ने टैक्सी यूनियन बनाकर उसके बैनर तले प्राइवेट नंबरों की गाड़ियों को कॉमर्शियल उपयोग के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी उठाई लेकिन संबंधित विभाग को इनकी आवाज नहीं सुनाई देती आखिर कब इनकी समस्याओं को सुना जाएगा और प्राइवेट टैक्सी के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।