तीन साल से ‘तालाब’ बनी मुख्य सड़क, नगर पंचायत की लापरवाही से जनता बेहाल
15 अगस्त तक समाधान नहीं तो परिवार सहित आमरण अनशन, विकास के दावों की खुली पोल
ग्रामीण न्यूज़ तेज नजर देवरिया
नगर पंचायत लार में विकास के दावों की जमीनी हकीकत हर बारिश के साथ पानी में बहती दिखाई दे रही है। पिछले तीन वर्षों से नगर की मुख्य सड़क तालाब में तब्दील हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि तमाशबीन बने हुए हैं। नगर पंचायत कार्यालय और पुलिस चौकी के ठीक सामने जलभराव की भयावह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
बस स्टैंड लार बाजार निवासी मंजू राय ने उपजिलाधिकारी सलेमपुर को प्रार्थना पत्र देकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 अगस्त 2026 तक जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो वह अपने परिवार के साथ घर के बाहर आमरण अनशन शुरू करेंगी। उनका कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
स्थिति यह है कि हल्की बारिश भी मुख्य सड़क को तालाब बना देती है। घुटनों तक भरे पानी में स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। कई लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की संवेदनहीनता पर कोई असर नहीं पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर पंचायत कार्यालय के सामने ही ऐसी बदहाली है, तो बाकी वार्डों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं पर उठ रहा है। मुख्य नाली का टेंडर फरवरी में हुआ, अप्रैल तक काम पूरा होना था, लेकिन पांच महीने बाद भी निर्माण अधूरा पड़ा है। अधूरी नाली और तकनीकी खामियों के कारण जलनिकासी पूरी तरह बाधित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाली सड़क से लगभग एक फुट ऊंची बना दी गई, जिससे पानी नाली में जाने के बजाय सड़क पर ही जमा हो रहा है। यदि यह आरोप सही है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि महीनों तक जाम पड़ी नालियों की सफाई नहीं कराई गई और बारिश शुरू होने के बाद आनन-फानन में सफाई अभियान चलाकर केवल औपचारिकता निभाई गई। सवाल यह है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता, तो क्या नगरवासियों को इस बदहाली का सामना करना पड़ता?
जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ चुका है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह मामला अब केवल जलनिकासी का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और जनसुरक्षा का भी बन चुका है।
उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव ने मामले की जांच कराकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है। हालांकि नगरवासियों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, धरातल पर कार्रवाई चाहिए। उनका सवाल है कि जब तीन वर्षों में समस्या का समाधान नहीं हो सका, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। यदि 15 अगस्त तक भी स्थिति नहीं बदली, तो लार नगर पंचायत में यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।