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हरितालिका तीज: आस्था, परंपरा और उमंग का संगम

 

ग्रामीण न्यूज़ – तेज नज़र, देवरिया

देवरिया।
सोमवार को जनपद देवरिया सहित पूरे पूर्वांचल के ग्रामीण अंचलों में हरितालिका तीज का पर्व महिलाओं की अपार आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही गाँव-गाँव की गलियों और मंदिरों में रंग-बिरंगे वस्त्रों और सुहागिनों के पारंपरिक श्रृंगार से सजी महिलाएँ पूजा-अर्चना में जुट गईं।

✨ धार्मिक महत्व

हरितालिका तीज का पर्व माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन का स्मरण कराता है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तप कर महादेव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण सुहागिन महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और अविवाहित कन्याएँ मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं। व्रत में महिलाएँ जल, अन्न और फल तक का त्याग कर निर्जला उपवास रखती हैं और रातभर जागरण कर शिव-पार्वती की कथा का श्रवण करती हैं।

परंपरागत उत्सव की छटा

गाँवों में सुबह से ही तालाबों और मंदिरों पर महिलाएँ एकत्र होकर पूजा-पाठ करती दिखीं। महिलाओं ने नए वस्त्र, हरी चूड़ियाँ, महावर, सिंदूर और सुहाग का संपूर्ण श्रृंगार कर शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को सजाया। पारंपरिक गीतों और लोक-भजनों की स्वर लहरियाँ वातावरण को और भी पवित्र बना रही थीं।

️ बाज़ारों में रौनक

तेज नजर संवाददाता के अनुसार, रविवार की रात से ही बाजारों में पूजा सामग्री, श्रृंगार की वस्तुएँ और मेहंदी की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। हाथों पर सजी मेहंदी और हरियाली रंग की चूड़ियों ने तीज के पर्व को और भी खास बना दिया।

संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव

गांव-गांव में झूला झूलने की परंपरा भी निभाई गई। महिलाएँ समूह में इकट्ठा होकर लोकगीत गातीं और पारंपरिक तीज के गीतों पर झूमती रहीं। यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है।

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आधुनिक परिवेश में तीज

आज के बदलते दौर में भी हरितालिका तीज का महत्व कम नहीं हुआ है। शहरों में रहने वाली महिलाएँ भी इस पर्व पर व्रत रखती हैं और ऑनलाइन पूजा सामग्री मंगवाकर परंपरा का निर्वहन करती हैं। यह दर्शाता है कि संस्कृति चाहे जैसे बदले, आस्था और परंपरा की जड़ें अभी भी गहरी हैं।

हरितालिका तीज पर पूरे देवरिया जनपद में भक्ति, उल्लास और पारंपरिक संस्कृति की जीवंत छटा देखने को मिली।

️ ग्रामीण न्यूज़ – तेज नज़र, देवरिया

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