कविता पर कविता
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता।
आओ जाने समझें बूझें कितनी न्यारी होती कविता।
सबके मन को भाती कविता
ढेरों बात बताती कविता।
राज छुपाए खुद में कविता
ज्ञान कराए हमको कविता।
झीलों झरनों वाली कविता
पर्वत नदियों वाली कविता।
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता।
आओ जाने समझें बूझें कितनी न्यारी होती कविता।
वीरों की बात बताती कविता
जौहर की याद दिलाती कविता।
बच्चों को हर्षाती कविता
फूलों सी महकाती कविता।
अम्मा की लोरी सी कविता
दादी की बोली सी कविता।
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता।
आओ जाने समझें बूझें कितनी न्यारी होती कविता।
महफिल में सबको भाती कविता
ताली भी बजवती कविता।
उपाधियां दिलवाती कविता
कवि का मान बढाती कविता।
कल की बात बताती कविता
ढेरों ज्ञान कराती कविता।
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता।
आओ जाने समझें बूझें कितनी न्यारी होती कविता।
सत्य उजागर करती कविता
साहस हममें भारती कविता।
कोयल की बोली सी कविता
बच्चों की टोली सी कविता।
मन के भाव जगाती कविता
देश प्रेम सिखलाती कविता।
बहुत दिनों से सोंच रही हूँ कविता पर लिखूं एक कविता।
आओ जाने समझें बूझें कितनी न्यारी होती कविता।
कभी बहुत लंबी सी कविता
कभी बहुत छोटी सी कविता
कभी जटिल सी लगती कविता
कभी समझ आजाती कविता
ढेरों ज्ञान दिलाती कविता
इस लिए मन को भाती कविता।

सीमा खातून
स. अ. सविलियन विद्यालय परासी चकलाल