सरकारी स्कूलन में गुरुजी पर ऐप अउर ट्रेनिंग के बोझ, पढ़ाई होत बर्बाद
सरकारी स्कूलन में गुरुजी पर ऐप अउर ट्रेनिंग के बोझ, पढ़ाई होत बर्बाद !
देवरिया
सरकारी स्कूलन में अब गुरुजी लोग पढ़ाई से जादे मोबाइल अउर ऑनलाइन ट्रेनिंग के चक्कर में फँस गइल बाड़ें।
हर रोज़ नया-नया ऐप, पोर्टल अउर ऑनलाइन रिपोर्टिंग के दबाव से शिक्षा के असली मकसद — बच्चन के पढ़ावल — धीरे-धीरे पीछे छूटत जा रहल बा।
गुरुजी लोग के कहना बा —
“दिन भर स्कूल में पढ़ाई, ऊपर से मोबाइल पर रिपोर्ट भेजल, स्क्रीनशॉट अपलोड कइल — अब घर गइला के बादो चैन से आराम नईखे मिलत।”
अब स्थिति एह लेवल तक पहुंच गइल बा कि गुरुजी लोग स्कूल टाइम के बादो मोबाइल पर सरकारी ऐपन में डेटा भरत रहेला।
घर-परिवार के जिम्मेदारी अउर निजी जीवन पर ई सिस्टम के सीधा असर पड़ रहल बा।
गुरु जी लोगन के कहना बा कि अब सरकार के चाहीं कि पढ़ाई पर जोर देवे, ना कि हर रोज़ नया-नया ऐप अउर ट्रेनिंग ले आवे।
दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारी कह रहल बाड़ें कि ई सब डिजिटल सशक्तिकरण खातिर बा — बाकिर जमीन पर असर उल्टा देखात बा।
बच्चन के पढ़ाई से जादे गुरुजी लोग मोबाइल में व्यस्त देखात बाड़ें।
कबहुँ हाजिरी ऐप, कबहुँ ट्रेनिंग ऐप, कबहुँ रिपोर्टिंग पोर्टल — दिनभर मोबाइल में फँसल गुरुजी लोग अब थकान अउर तनाव से गुजर रहल बाड़ें।
एक शिक्षक कहले —
“अब पढ़ाई कम, रिपोर्टिंग जादे हो रहल बा। सरकार के नौकर त बानी, नौकरी त करहीं के पड़ी, बाकिर अब पहिले जइसन आदर-सम्मान ना रह गइल।”
गांव में जब लोग देखेला कि गुरुजी दिनभर मोबाइल चलावत बाड़ें, त लोगन के मन में सवाल उठेला —
“पढ़ाई छोड़ मोबाइल काहे?”
बाकिर सच्चाई ई बा कि ई सब काम सरकार के आदेश पर होत बा।
आज सरकारी स्कूल में शिक्षा ना, ऐप अउर रिपोर्टिंग सिस्टम हावी हो गइल बा।
एह हालात में ना गुरुजी चैन में बाड़ें, ना बच्चन के पढ़ाई सही दिशा में चल रहल बा —
शिक्षा व्यवस्था चरमराए लागल बा।
आप लोगन के गांव के का हाल बा कमेंट बॉक्स में जरूर लिखब
रियासत अली