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“मशरूफ मगर मजबूर नहीं: शिक्षक की व्यथा”

शिक्षक की व्यथा: टेट की अनिवार्यता पर आए फैसले के बाद एक टीचर की कविता

सीमा अली द्वारा रचित एक मार्मिक अभिव्यक्ति

“मशरूफ मगर मजबूर नहीं: शिक्षक की व्यथा”

हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा TET को लेकर लिए गए निर्णय के बाद हजारों शिक्षकों में असमंजस और असंतोष की भावना है। इस निर्णय ने न सिर्फ़ उनके भविष्य को प्रभावित किया है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और जीविका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इन्हीं भावनाओं को शब्दों का रूप दिया है शिक्षिका सीमा अली ने, जिन्होंने अपने अनुभव, दर्द और जिम्मेदारियों को एक कविता के माध्यम से सबके सामने रखा है।
यह कविता सिर्फ़ एक शिक्षक की नहीं, बल्कि हर उस कर्मशील और संवेदनशील व्यक्ति की आवाज़ है जो व्यवस्था में रहते हुए अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहा है।

 

“जिम्मेदारियों के बोझ तले झुके गुरुजन”

सीमा अली

अब कैसे दें परीक्षा, मुश्किल में पड़े हैं हम,
मसरूफ बड़े रहते हैं, लाचार थोड़े हैं हम।
इतने बरस की खिदमत का कैसा ये खामियाज़ा,
थोपा है TET हम पर, यह तुगलकी फरमाना।

हिंद के मुस्तकबिल को हम तो ही बनाते हैं,
है बहुत जो पिछड़े, हम उनको पढ़ाते हैं।
है कोर्ट का जो ऑर्डर, हमको नहीं सुहाता,
इसको रिटर्न करके, हमको दो हक़ हमारा।

हम पर हैं ज़िम्मेदारी, आज तो बहुत ही,
जो हमको है निभानी, अब लो सुनो जुबानी।

हम दाल नमक लाते, सब्ज़ी ख़रीदते हैं,
चावल का बोरा ढोते, सिलेंडर भी उठाते हैं।
कभी बने फल वाले, कभी ग्वाले भी बनते हैं,
ढोते हैं कभी फल तो कभी बाल्टी उठाते।

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MDM बनवाते हैं, खाना भी है खिलवाते
जब फ़ोन घनघनाता, संख्या भी है दबाते।
है ‘निपुण’ की ज़िम्मेदारी, असेसमेंट भी करते हैं,
पौधा है हम लगाते, फोटो भी खींचाते हैं।

इतना से भी न माने, तो ऐप में भरते हैं,
किसने लगाया पौधा, यह प्रूफ भी करते हैं।
BLO भी बने हम ही, सर्वे भी कराते हैं,
चुनाव हम कराके, सरकार बनाते हैं।

हम पर हैं जिम्मेदारी, सब काम ऑनलाइन,
हम नाम भी लिखते हम फीड कराते हैं
वैज्ञानिक भी हम बनाते नया खोज कराते हैं
आया नया जमाना,अब यू डायस है आया

कभी नाम जोड़ते हैं कभी नाम हटाते हैं
रह जाती है जो कमियां उसको सुधारते हैं
होता है तभी  हल्ला जब डीबीटी करते हैं
हर बच्चे के खाते में पैसे भी भेजवाते

पैसा अगर न पहुंचा,तो गाली भी खाते हैं
अब तो हर एक हफ्ते एक नया ऐप आता
हम उसको समझते हैं और करते हैं समीक्षा
अब कैसे दे परीक्षा अब कैसे दे परीक्षा
मुश्किल में…………..

अब पूछता है सिस्टम – क्या है TET का साइन?

सीमा अली एक संवेदनशील शिक्षिका हैं, जो शिक्षा क्षेत्र में अपने वर्षों के अनुभव के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी पैनी नजर रखती हैं। उनका लेखन जनमानस की आवाज़ साबित हो रहा है।

 

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