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आजकल बच्चों का बचपन, पढ़ाई के बढ़ते दबाव और आधुनिक जीवनशैली के कारण, “बच्चों का खोता हुआ बचपन

आजकल बच्चों का बचपन, पढ़ाई के बढ़ते दबाव और आधुनिक जीवनशैली के कारण, “खोता हुआ बचपन”

आधुनिक समाज ने अपने बच्चों से उनका बचपन छीना….

आज कल बच्चे मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर की दुनिया में इतने उलझ गए हैं कि असली खेल-कूद और मिट्टी में खेलने वाली दुनिया जैसे पीछे छूटती जा रही है। पहले बच्चे गलियों में शोर मचाते, पेड़ पर चढ़ते, दोस्तों के साथ लुका-छिपी खेलते थे। मगर अब उनका ज्यादातर समय स्क्रीन पर गेम खेलने और वीडियो देखने में बीतता है। इसका असर उनके शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ रहा है। न तो शरीर ठीक से हिलता-डुलता है, न आंखें आराम पाती हैं। कई बच्चे तो अकेलेपन और गुस्से का शिकार भी हो जाते हैं। पढ़ाई से मन हटता है और सामाजिक व्यवहार भी कमजोर होने लगता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को तकनीक के साथ-साथ असली दुनिया से भी जोड़े रखें। मोबाइल की बजाय उन्हें बाहर खेलने भेजें, कहानियां सुनाएं, साथ बैठ कर उनसे बातें करें। तकनीक बुरी नहीं है, लेकिन अगर उसके इस्तेमाल का सही तरीका न हो, तो वह बच्चों से उनका बचपन छीन सकती है

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