एक पेड़ माँ के नाम… लेकिन बाकी कटते पेड़ किसके नाम?
एक पेड़ माँ के नाम… लेकिन बाकी कटते पेड़ किसके नाम?
देशभर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। यह एक सराहनीय पहल है। लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठता है—जो बड़े-बड़े पेड़ लगातार सड़कों, निर्माण कार्यों और अन्य कारणों से काटे जा रहे हैं, उनकी भरपाई कैसे होगी?
केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगाए गए पौधों में से कितने अगले एक, तीन और पाँच वर्षों तक जीवित रहते हैं। यदि पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल नहीं होगी, तो अभियान का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब लगाए गए पौधे पेड़ बनें और पर्यावरण को वास्तविक लाभ पहुंचाएँ। इसलिए अब समय है कि केवल पौधारोपण की संख्या नहीं, बल्कि पौधों के जीवित रहने की दर पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।
पेड़ लगाना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है उन्हें बचाना।