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अग्निवीर अश्विनी गौतम को अंतिम विदाई, गांव में पसरा मातम देवरिया।

 ग्रामीण न्यूज तेज नजर 

अग्निवीर अश्विनी गौतम को अंतिम विदाई, गांव में पसरा मातम
देवरिया।
अग्निवीर अश्विनी गौतम के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने गांव पहुंचकर शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की और अग्निवीर की माता प्रमिला देवी को ढांढस बंधाया। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन हर संभव सहायता प्रदान करेगा। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों और परिजनों से कहा कि वे किसी भी समस्या या मांग को लेकर कार्यालय में आकर सीधे संपर्क कर सकते हैं।
इस दौरान अग्निवीर के घर के बाहर ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। युवाओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत नारे लगाते हुए कहा—
“जब तक सूरज-चांद रहेगा, तब तक अश्विनी तेरा नाम रहेगा।”
पूरा माहौल गम और गर्व के भाव से भरा नजर आया।
परिवार की जिम्मेदारियों का सहारा थे अश्विनी
अग्निवीर अश्विनी गौतम अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनके बड़े भाई अवनीश कुमार निजी नौकरी करते हैं, जबकि छोटे भाई विशाल कुमार अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह अश्विनी के कंधों पर थी। उनकी अभी शादी नहीं हुई थी। उनके असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मिलनसार स्वभाव और देशभक्ति की मिसाल थे अश्विनी
ग्रामीणों के अनुसार अश्विनी बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। वे बेहद मिलनसार, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से भरे हुए युवक थे। उनकी अचानक हुई मृत्यु से गांव ने एक होनहार और जांबाज सपूत को खो दिया।
मां प्रमिला देवी बेटे का शव देखते ही फूट-फूट कर रोने लगीं और बदहवास हो गईं। पिता बीरबल प्रसाद, बड़े भाई अवनीश और छोटे भाई विशाल का भी रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के लोग लगातार परिजनों को ढांढस बंधाने में जुटे रहे।
घाघरा तट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
मंगलवार को घाघरा नदी के तट पर अग्निवीर अश्विनी गौतम का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अंतिम विदाई के समय गांव का माहौल बेहद भावुक रहा।
अश्विनी की शहादत से खरवनिया टोला मल्लह पुरवा गांव में दो दिनों तक चूल्हे नहीं जले। गांव में सन्नाटा पसरा रहा और हर घर में शोक का माहौल दिखाई दिया। जैसे ही शव गांव पहुंचा, हर आंख से आंसू छलक पड़े।
अग्निवीर अश्विनी गौतम की कुर्बानी को गांव और क्षेत्रवासी हमेशा गर्व और सम्मान के साथ याद रखेंगे।

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