पटना शरीफ मेहरौना घाट में 63 वां उर्स का आयोजन सम्पन्न
पटना शरीफ मेहरौना घाट में 63 वां उर्स का आयोजन सम्पन्न
किसी ने क्या खूब कहा है
हमारा सज्दा है हर गाम पर पीर-ए-तरीक़त को
सुलूक-ए-इश्क़ में सर है क़दम मरकब से क्या मतलब.
हमें तो यार से मतलब है ‘साहिर’ और यारी से
हमारा यार और अग़्यार के मतलब से क्या मतलब.
जनपद देवरिया क्षेत्र लार के पटना शरीफ मेहरौना घाट मे हाफजी कुतुबुल आरेफीन हजरत सैयदना हाफिज आबिद अली प्यारे शाह रह०का 63 वां सालाना उर्स मनाया गया।
हर साल की तरह चादर पोशी , फातिहा दी गई व मिलाद शरीफ़ का आयोजन किया गया जिसमें कई नातखांओं ने नात प्रस्तुत किया और दूर दराज से आए सभी लोगों के के लिए भोजन का प्रबंध किया गया था पीर सहब ने आये सभी लोगों को खाना खाकर ही जाने की बात कही जिसमें युपी , बिहार व झारखंड के पीरे तरीकत के तमाम लोग शिरकत फरमाए थे। सूफी संत की बात करें तो यह लोग मजहब से ऊपर उठ जाते हैं उनका मजहब केवल इंसानियत रह जाता है।